23 नवंबर, 2014
पूजनादास्य लिंगस्य अभ्यर्चनात सश्रध्दया | सर्वपाप विनिर्मुक्तः शिव सायुज्यमाप्नुयात ||
पूजनादास्य लिंगस्य अभ्यर्चनात सश्रध्दया | सर्वपाप विनिर्मुक्तः शिव सायुज्यमाप्नुयात ||
स्फटिक लिंगं प्रतिष्ठांप्य याजती यो पुमान | रोगं शोकं च दारिद्रयं सर्व नश्चती तद गृहात ||
स्फ़टिक लिंगमाराघ्यं सर्वसौभाग्यदायकम | धनं धान्यं प्रतिष्ठाम च आरोग्यं प्रददाती स: ||
जटाटवीग लज्जलप्रवाहपावितस्थले । गलेऽवलम्ब्यलम्बितां भुजंगतुंगमालिकाम्। डमड्डमड्डमड्डम न्निनादवड्डमर्वयं । चकार चंडतांडवं तनोतु नः शिवः शिवम ॥1॥
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
तो चलिए, इस बार आपको लिए चलते है नए 'ठीये' पर .. जहां की 'कचौरी' बेहद बढ़िया है (माफ कीजिये!...
नमामि शमीशान निर्वाण रूपं | विभु व्यापकं ब्रह्मवेद स्वरूपं
ध्यानं आरति समये हृदये अति कृत्वा। रामस्त्रिजटानाथं ईशं अभिनत्वा॥ संगतिमेवं प्रतिदिन पठनं यः कुरुते। शिवसायुज्यं गच्छति भक्त्या यः श्रृणुते
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