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व्यक्तिगत आपदा प्रबंधन

व्यक्तिगत आपदा प्रबंधन

by Admin
January 16, 2016
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ईश्वर न करे किसी के साथ भी कोई दुर्घटना हो। लेकिन असुरक्षा जीवन का दूसरा नाम है। जीवन जरा भी सुरक्षित नहीं है। जीवन जोखिम भरा होता है। जब सब ठीक चलता है तो हम बेफिक्र रहते हैं। कोई दुर्घटना, भूकम्प या अन्य प्राकृतिक आपदा की खबर सुनते हैं तो भी यह मान लेते हैं कि अपने साथ तो यह नहीं हो सकता। सरकार का अलग एक विभाग है ‘आपदा प्रबंधन’ का। जब भी कोई प्राकृतिक आपदा या बड़ी दुर्घटना होती है तब आपदा प्रबन्धन से जुड़े लोग और मिलेट्री को बुलाया जाता है। परन्तु क्या हम स्वयं आपदा से निपटने को तैयार हैं या आपदा आने पर किसी की मदद कर सकते हैं? हम बात कर रहें है ‘व्यक्तिगत आपदा प्रबंधन’ की।

पिछले दिनों चेन्नई में भीषण बाढ़ का प्रकोप था। इस बाढ़ से मेरे एक घनिष्ठ मित्र सुरेश कर्वे भी प्रभावित हुए। सुरेश कर्वे भारतीय तट रक्षक के कमांडेंट पद से स्वेच्छा से सेवा निवृत होकर वर्तमान में एल. एंड टी. कम्पनी में उच्च पद पर कार्य कर रहे हैं। इस कठिन समय में उन्होंने जो महसूस किया और शेयर किया वो हम सभी के लिए अत्यंत उपयोगी है।

  • बाढ़, आगजनी, भूकंप या ह्रदय घात के छोटे से संकट को भी गंभीरता से ले। यह कभी भी विकराल रूप ले सकते हैं।
  • यह नहीं सोचें की यह हमारे साथ या हमारे अपनों के साथ नहीं हो सकता, यह भी न सोचें कि यह हमारे साथ ऐसा होगा ही परन्तु यह अवश्य सोचें कि अगर हमारे साथ ऐसा होता है तो क्या हम तैयार हैं?
  • अपने सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज जैसे मार्कशीट, पासपोर्ट, पेन कार्ड और अन्य आई. डी. लेमिनेट करवा लें और स्कैन कर पेन ड्राइव या गूगल ड्राइव या ड्राप बॉक्स में सेव कर लें। प्रधानमन्त्री द्वारा ऑनलाइन डीजी लॉकर की सुविधा आरम्भ की है जिसमें आप महत्वपूर्ण दस्तावेज सुरक्षित रख सकते हैं।
  • इन सभी दस्तावेजों को एक अच्छे बेग में या ब्रीफ केस सुरक्षित रखें।
  • अपने सभी महत्वपूर्ण पासवर्ड किसी डायरी में नोट कर लें हालांकि यह सलाह दी जाती है कि उन्हें याद रखें लकिन इतने पासवर्ड याद रखना और समय-समय पर परिवर्तन कर याद रखना आसान नहीं है। फिर घबराहट में हम भूल भी जाते हैं। यह डायरी सुरक्षित जगह रखें या बैंक लाकर में रखें या डीजी लॉकर में रखें।
  • अगर मोबाइल स्क्रीन लॉक कर रखी है तो उसका पासवर्ड अपनी पत्नी को या भाई को या बहन को या माता-पिता को बता कर रखें।
  • अपने बैंक अकाउंट के बारे में, इन्सुरेंस पालिसी के बारे में, एफडीआर, पी.पी.एफ. इत्यादि की जानकारी अपनी पत्नी और बच्चों को अवश्य दें।
  • अपने सारे बचत खातों में या या शेयर इत्यादि में नॉमिनी अवश्य डालें।
  • हाउस होल्ड इन्सुरेंस करवाना बेहतर होता है। यह चोरी इत्यादि में भी क्षतिपूर्ति करता है।
  • आपके मोबाइल में या डायरी में अलग से इमरजेंसी नंबर की सूची अवश्य हो जैसे चिकित्सक, घनिष्ठ मित्र, पुलिस, अस्पताल, फायर ब्रिगेड इत्यादि।
  • घर पर सभी को ज्ञात हो की गैस सिलिंडर कैसे बंद कर अलग किया जा सकता है? बिजली का मैं स्विच कहाँ है और कैसे ऑफ या ऑन होता है?
  • अपने को हमेशा शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रखें ताकि अपनी और दूसरों की मदद कर सकें।
  • घर पर एक निश्चित सुरक्षा निधि अवश्य रखें।
  • घर पर एक नियत स्थान पर टोर्च, चाबियाँ, मोबाइल पॉवर बैंक, चार्जर इत्यादि रखें, ताकि आप तत्काल उन्हें और महत्वपूर्ण दस्तावेजों को लेकर सुरक्षित स्थान पर जा सके। 
  • डुप्लीकेट चाबी विश्वसनीय पड़ोसी या रिश्तेदार को देकर रखें।
  • बच्चों को एटीएम, बैंक, इन्टरनेट बैंकिंग इत्यादि की प्रक्रिया कम उम्र में ही सीखा दें।
  • जहाँ नौकरी कर रहे हैं वो संस्था आपको संकट के समय क्या मदद कर सकती है या आपके न रहने पर क्या क्षतिपूर्ति देगी यह जानकारी भी आपके परिवार को देकर रखें।

श्री सुरेश कर्वे द्वारा उपरोक्त दिए गए सुझाव महत्वपूर्ण हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यह महसूस किया गया है कि सबसे ज्यादा असुरक्षा जो समाज में बढ़ी है वो है रिश्तों की असुरक्षा। रिश्तों की डोर पतली होती चली जा रही है। यह दौर है आपसी विश्वास के अतिक्रमण का। पिता अपने बच्चों से, पत्नी पति से या पति पत्नी से वो सब कुछ शेयर नहीं कर रहें हैं जो उन्हें करना ही चाहिए। आज व्यक्तिगत जीवन इतना साफ़ सुथरा नहीं रह गया है कि वो खुली किताब की तरह हो। क्या पिता अपने बच्चों को पूरी ईमानदार से अपनी कमाई बता सकते हैं? क्या ये भी बता सकते हैं कि कितनी कमाई बेईमानी की है? बच्चे क्या इमानदारी से अपने मित्रों के बारे में या कहाँ आ-जा रहें हैं बता सकते हैं? क्या पति अपनी पत्नी को अपनी पूरी आमदनी बता देते है? क्या आप अपना या बच्चे का मोबाइल एक दुसरे को दे सकते हैं? क्या हम अपने पडोसी या घनिष्ठ मित्रों पर भरोसा कर सकते हैं?

ये तमाम प्रश्न हैं, जिनका उत्तर अगर हाँ है तो व्यक्तिगत आपदा प्रबंधन आपको और आपके परिवार को बहुत सी मुसीबतों से बचा सकता है।   

– प्रवीण गार्गव

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